वैदिक ज्योतिष और कर्मकांड में जब किसी एक ग्रह की शांति कराई जाती है, तो उस ग्रह के मूल बीज मंत्र या वैदिक मंत्र का आवश्यक जप (अनुशंसित मंत्र संख्या) की जाती है।
इसी मंत्र संख्या को 4 गुना यानी चौगुना करने की परंपरा है। यह परंपरा शास्त्रों, पुराणों और ज्योतिषियों की स्मृति पर आधारित है।
🔶 जप को 4 गुना करने का मुख्य उद्देश्य
1) कर्मदोष को संतुलित करने के लिए
किसी ग्रह का नकारात्मक प्रभाव केवल वर्तमान कर्मों का परिणाम नहीं होता, बल्कि
- पिछले जन्मों के कर्म
- इस जन्म के पूर्व के कर्म
- मानसिक वाणी के कर्म
- व्यवहार के कर्म
इन सभी का संयुक्त प्रभाव होता है।
इसीलिए कहा जाता है कि मूल मंत्र का 4 गुना जप इन चार स्तरों के कर्मों को शांत करने के लिए किया जाता है।
2) ग्रह के 4 आयामी प्रभाव को संतुलित करने के लिए
हर ग्रह जीवन के चार प्रमुख क्षेत्रों पर प्रभाव डालता है—
- शरीर (Physical)
- मन (Mental)
- वाणी (Speech)
- कर्म (Actions)
ग्रह शांति में 4 गुना मंत्र जप इसी चारों आयामों की शुद्धि और संतुलन के लिए माना जाता है।
3) मंत्र की ऊर्जा को पूर्णता देने के लिए
शास्त्र कहते हैं कि मंत्र की शक्ति तभी सिद्ध होती है जब जप —
- निष्ठा,
- संकल्प,
- मात्रा,
- और विधि से
पूरा किया जाए।
4 गुना मंत्र जप का अर्थ है कि ग्रह की ऊर्जा को 100% activated करना, ताकि उसका शुभ फल मिल सके और दोष शांत हो।
4) मन, वाणी, प्राण और आत्मा की शुद्धि
मंत्र की कंपन शक्ति 4 स्तरों पर कार्य करती है:
- मन — विचार शांति
- वाणी — बोलने की ऊर्जा को सुद्ध्ध करना
- प्राण — शरीर की जीवन शक्ति बढ़ाना
- आत्मा — आध्यात्मिक उन्नति
इन्हें संतुलित करने के लिए जप को 4 गुना किया जाता है।
🔶 इसके पीछे पारंपरिक कथा (लोक परंपरा में प्रचलित)
पुराणों में एक कथा आती है कि प्रजापति दक्ष ने जब अपनी 27 कन्याओं का विवाह चंद्रदेव से किया, तो चंद्रदेव एक ही पत्नी पर अधिक प्रेम दिखाकर शेष देवियों (नक्षत्रों) को दुख देने लगे।
इससे ब्रह्मांड में असंतुलन फैलने लगा।
देवताओं ने भगवान महादेव से प्रार्थना की, तब महादेव ने कहा:
“जब भी कोई ग्रह असंतुलित हो, उसकी शांति के लिए चार गुना जप किया जाए,
ताकि उसके द्वारा प्रभावित चार दिशा, चार भाव और चार स्तर के जीवों को संतुलन मिले।”
इस कथा को कई पंडित कथाओं के रूप में बताते हैं, ताकि भक्त ग्रह जप के महत्व को समझ सकें।
🔶 एक और व्यावहारिक कारण – ‘मंत्र सिद्धि’
किसी भी मंत्र की सिद्धि के लिए पारंपरिक मात्रा होती है:
- 11,000
- 21,000
- 51,000
- 1,25,000
लेकिन ग्रह शांति में इसे सरल बनाकर
मूल मंत्र संख्या × 4 कर दिया गया है, ताकि गृहस्थ जीव भी आसानी से ग्रह शांति करा सकें।
🔶 निष्कर्ष (सार)
ग्रह शांति में जप को 4 गुना करना इसलिए आवश्यक माना जाता है क्योंकि:
✔ यह कर्मों के चार स्तरों को शांत करता है
✔ ग्रह के चार आयामी प्रभाव को संतुलित करता है
✔ मंत्र की ऊर्जा को पूरा प्रभाव देता है
✔ मन–वाणी–प्राण–आत्मा की शुद्धि होती है
✔ शास्त्रों और पुराणों में इसका आधार मिलता है





